कालचक्षु….. एक अधुरी कहानी.

कहानिया हमारी जिंदगी का हिस्सा होती है और वो जिंदगी से कभी अलग नही होती. जिंदगी है तो कहानिया भी है. जैसे कहानिया जिंदगी से जुडी होती है. वैसे ही तसवीरे भी जिंदगी से जुडी होती है भले ही हम इन्हे बेजान समझे पर ये जिंदा होती है क्यों की इसे बनाने वाला इसमे अपनी जान डाल देता है तो ये जिंदा ही हुई ना. क्या होगा अगर ऐसी ही बेजान तसवीर जिंदा हो जाये तो.
ये कहानी है 25 साल के लडके की जिसका नाम अद्विक है जो इंजिनियरिंग के आखरी साल मे पढ रहा है. अद्विक और उसकी माँ सिर्फ इतनी ही दुनिया है उसकी. अद्विक उठ बेटा देख सुबह के आठ बज गये है तू कॉलेज कब जायेगा? अद्विक की माँ बाल्कनी मे कपडे सुखाने के लिये डालते डालते चिल्ला रही थी लेकिन अद्विक अभी भी सपनो की दुनिया मे सैर कर रहा था. अद्विक की कोई आवाज ना आते देख उसकी माँ उपर उसके कमरे के बाहर आ जाती है और कमरे का दरवाजा खोलती है. जैसे ही अद्विक की माँ कमरे का दरवाजा खोलती है तो देखती है की कमरे का सारा सामान इधर उधर बिखरा पडा हुआ है एक भी चीज अपनी जगह पे नही थी. कमरे के एक कोने मे पेन्टिंग स्टॅन्ड पे एक पेन्टिंग लगी हुई थी जिसपे एक अजीब सी पेन्टिंग बनाई हुई थी. देखने से तो वो किसी शैतान से कम नही लग रही थी और उधर बेड पे अद्विक आराम से लेटा पडा था जैसे उसे किसी बात की चिंता ही ना हो. कमरे की हालत और वो पेन्टिंग देखकर अद्विक की माँ अपने सर पे हाथ रखकर चिल्लाते हुये अंदर आती है देखो अभी तक सो रहा है घोडे बेच के और कमरे की हालत तो देखो ऐसा लग रहा है जैसे भूकंप आके चला गया हो और उपर से ये अजीब सी तसवीरे पता नही रातभर क्या बनाता रहता है? और फिर सुबह देर तक सोता रहता है.मुझे तो डर लग रहा है कही इसे किसी आत्मा ने वश मे तो नही कर लिया? हे भगवान अब क्या होगा मेरे बेटे का? माँ की चिल्लाने की और बडबडाने की आवाज सुनकर अद्विक की नींद खुल जाती है वो अपनी आँखे मसलते और उबासी देते हुये कहता है क्या हुआ माँ क्यूँ सुबह सुबह चिल्ला रहे हो? तब अद्विक की माँ कहती है चिल्लाऊ नही तो क्या तेरी आरती करू?एक तो सुबह जल्दी नही उठता और उपर से कमरे की हालत देखो क्या बना दी है.थक जाती हू मै दिनभर ये सब सब समेटते समेटते और ये अजिबो गरीब तसवीरे. आजकल तो मुझे तेरे कमरे मे भी आने से डर लग रहा है. बेटा सच बता तुझे किसी आत्मा ने वश मे तो नही किया ना? तब अद्विक कहता है क्या माँ आप भी ना कुछ भी बोलते हो और मुझे जो चाहे कहलो लेकिन मेरी पेंटिंग्स के बारे मे कुछ मत कहना. तब अद्विक की माँ कहती है हा हा क्यूँ कुछ ना बोलू? ऐसी पेन्टिंग्स कौन बनाता है? देखकर भी डर लग रहा है. सारे कमरे मे ऐसी ही पेन्टिंग्स लगी हुयी है अगर बनाना ही है तो कुछ अच्छा बनाओ ना. ऐसी पेन्टिंग्स क्यूँ बनाते हो? तब अद्विक चिडते हुये कहता है माँ प्लीज आपसे कहा ना मेरी पेन्टिंग्स के बारे मे कुछ मत बोलो मै इनके खिलाफ एक शब्द नही सुनूंगा और आप नही समझोगे मेरी पेन्टिंग्स को तब अद्विक की माँ कहती है हा हा बडा आया अच्छा चल जल्दी से उठ देख 8 बज गये है कॉलेज कब जायेगा तू? जल्दी से तैयार हो जा और नाश्ते के लिये नीचे आ तेरी एक नही सुनूंगी मै चल जल्दी उठ. इतना कहकर उसकी माँ कमरे से चली जाती है. अपनी माँ के जाने के बाद अद्विक अपने बेड पर से उठता है और कोने मे पेन्टिंग स्टॅन्ड पे लगी पेंटिंग को देख मुस्कुराता है और कहता है ये दुनिया नही समझेगी मेरे टॅलेंट को. देखना एकदिन यही सब मेरी तारीफ करेंगे. इतना कहकर वो अपनी पेंटिंग को चुमता है और नहाने के लिये चला जाता है.
थोडी देर बाद वो नहाके बाथरूम से बाहर आ जाता है और कॉलेज जाने के लिये तैयार होने लगता है वो लगबग तैयार हो ही गया था की तभी उसके कमरे के दरवाजे पर ठकठक की आवाज होती है. अद्विक को लगता है की उसकी माँ है इसलिये वो कहता है अरे आ रहा हू माँ बस तैयार हो रहा हू. तभी दरवाजे पर फिर से ठकठक की आवाज सुनाई देती है अद्विक बडबडाते हुये दरवाजा खोलता है अरे माँ आपको बोला ना….इतना कहते हुये वो बीच मे ही रुक जाता है और अपने सामने उसकी दोस्त काव्या को खडा देख चौक जाता है. अचानक काव्या को अपने कमरे के बाहर खडा देख अद्विक चौक गया था जिसके वजह से वो एकटक काव्या को देखे जा रहा था और उसका मूह खुला ही रह गया था. ये बात काव्या नोटीस कर लेती है और वो हसने लगती है तभी अचानक खिडकी से हवा का एक झोका आता है और जिसके वजह से काव्या की जुल्फे उसके चेहरे पे आ जाती है अब तो वो और भी सुंदर लग रही थी वो अपनी जुल्फे चेहरे पर से हटाते हुये अद्विक से कहती है अरे अद्विक, हॅलो कहा खो गये?अपना मूह तो बंद कर लो. इतना कहकर वो हसने लग जाती है. तभी अद्विक अपना होश संभालते हुये कहता है अरे…वो… तुम.. तुम कब आयी? वो तुम्हे यहा अचानक देखा ना तो मै शॉक हो गया मुझे लगा माँ है. अद्विक को इतना हिचकीचाते देख काव्या मुस्कुराती है और कहती है अरे अंदर नही बुलाओगे क्या? तब अद्विक कहता है हा हा आओ ना इतना कहकर वो उसके सामने से हट जाता है और उसे अंदर आके बैठने के लिये कहता है. अंदर आते ही काव्या देखती है की कमरे मे सारा सामान इधर उधर बिखरा पडा है और कोने मे एक पेन्टिंग स्टॅन्ड पे एक पेन्टिंग लगी हुयी है अद्विक काव्या की तरफ देखते हुये कहता है वो दरसल रात को सोने के लिये देर हो गयी थी तो सामान जरा बिखरा हुआ है. अद्विक बेड पर का थोडा सामान हटाता है और वहा पर थोडी जगह बनाते हुये कहता है आओ ना तुम यहा बैठो.काव्या बेड पे बैठ जाती है और उसके हातो मे जो किताब थी वो अपने साईड मे रख देती है. अद्विक वो किताब देख लेता है.देखने से तो वो किताब थोडी पुरानी लग रही थी. उस किताब को देखकर अद्विक काव्या से पूछता है ये क्या है? कौनसी किताब है ये?
तब काव्या वो किताब अपने हात मे लेती है और उसपर से हात घुमाते हुये कहती है ये किताब वो मै लायब्ररी से लायी थी पढने के लिये तुम्हे तो पता है ना मुझे पुरानी किताबे पढना कितना पसंद है तब अद्विक काव्या के हातों से वो किताब लेते हुये कहता है जरा दिखाना तो कौनसी किताब है? अद्विक अपने हातों मे वो किताब लेता है और देखने लगता है. उस किताब पे बडे अक्षरों मे एक नाम लिखा होता है “कालचक्षु” और उसके नीचे छोटे अक्षरों मे उस किताब के लेखक का नाम लिखा होता है “अभिमन्यु रहेजा” और उस किताब पे एक अजीब से काले इन्सान की तसवीर होती है जिसकी आँखे लाल रंग की होती है. अद्विक उस किताब को देख ही रहा होता है की तभी काव्या उसे कहती है अरे लाओ इधर दो वो किताब. तुम्हे कब से किताबे पढने का शौक लग गया, तुम बनाओ तुम्हारे ये अजीब से पेन्टिंग्स. तब अद्विक थोडा चिडते हुये कहता है तुमसे कितनी बार कहा है मेरी पेन्टिंग्स के बारे मे कुछ मत कहा करो. सुबह माँ ने पकाया और अब तुम भी शुरु हो गयी. तब काव्या अद्विक को गुस्से मे देख उसे शांत करते हुये कहती है अच्छा बाबा सॉरी कुछ नही कहुंगी तुम्हारे पेन्टिंग को लेकिन एक बात बताओ इतने सारे अजीब पेन्टिंग बनाके तुम करने क्या वाले हो?क्यों की ये कोई नॉर्मल पेन्टिंग तो है नही की इसे कोई खरीदे. तब अद्विक कहता है नाम क्या है मेरा अद्विक मतलब पता है मेरे नाम का अद्विक मतलब अलग, युनिक. मेरे जैसा कोई नही तो मेरा काम भी युनिक ही होगा ना और मै ये पेन्टिंग्स सेल करने वाला हू ऑनलाईन वेबसाईट पे. मैने इसे एक वेबसाईट पे अपलोड भी किया है देखना कोई ना कोई खरीद ही लेगा और एक दिन मै एक बडा आर्टिस्ट बन जाऊंगा. उसे बीच मे रोकते हुये काव्या कहती है बस बस अब अपने सपनो की दुनिया से बाहर आ जाओ हमे कॉलेज जाने के लिये देर हो रही है चलो जल्दी और ये किताब दो मुझे तब अद्विक उस किताब पर जो तसवीर थी उसे देखकर कुछ सोचने लगता है तब काव्या उसे कहती है अब क्या हुआ? क्या सोचने लग गये? तब अद्विक कहता है कुछ नही बस ये किताब मुझे दे दो. तब काव्या कहती है नही मुझे पढनी है ये किताब. तब अद्विक उससे रिक्वेस्ट करते हुये कहता है प्लीज यार दे दो ना मुझे मै जल्दी लौटाऊंगा तुम्हे. अद्विक के बार बार रिक्वेस्ट करने पर काव्या उसे वो किताब दे देती है और कहती है ठीक है लेकिन जल्दी लौटाना. अब चलो देर हो रही है हमे कॉलेज भी पहुचना है. तब अद्विक हा कहते हुये वो किताब अपने टेबल के ड्रॉवर मे रख देता है और अपनी बॅग लेके काव्या के साथ नीचे हॉल मे आता है. तभी अद्विक की माँ कहती है अद्विक बेटा आ बैठ मै तुझे नाश्ता देती हू और काव्या तू कुछ खायेगी? तब अद्विक कहता है माँ माँ सुनो ना आज मुझे बहुत देर हो गयी है मै कॉलेज के कॅन्टीन मे कुछ खा लुंगा सॉरी. तब अद्विक की माँ कहती है देखा काव्या ये हमेशा ऐसा करता है अब तुही समझा इसे कुछ. तब काव्या कहती है आंटी आप चिंता मत किजिये हम खा लेंगे कॅन्टीन मे कुछ अभी हमे बहुत देर हो रही है हम चलते है. इतना कहकर वो दोनो कॉलेज के लिये निकल जाते है. थोडी ही देर मे दोनो कॉलेज पहुच जाते है. अद्विक अपनी bike को पार्क कर ही रहा था की तभी वहा पर अद्विक का दोस्त रोहित और काव्या की दोस्त प्रिया और कृतिका आ जाते है. सब मिलके लेक्चर के लिये चले जाते है.
लेकिन आज अद्विक का क्लास मे बिलकुल भी ध्यान नही था. वो अभी भी सुबह काव्या ने जो किताब दी थी उसके बारे मे सोच रहा था. खास करके उस तसवीर के बारे मे. दिनभर वो इसी सोच मे डुबा हुआ था. शाम को वो घर आ जाता है और चाय पीके अपने कमरे मे चला जाता है और अपने कमरे का दरवाजा बंद करता है और टेबल का ड्रॉवर खोलके वो किताब बाहर निकलता है. अद्विक वो किताब लेके बेड पे जा बैठता है. किताब पे जो तसवीर थी अद्विक उसे गौर से देख रहा था. थोडी देर बाद वो उस किताब का पहला पन्ना खोलता है. देखते ही देखते थोडी ही देर मे वो पुरी किताब पढ लेता है. पढते पढते उसे वक्त का अंदाजा ही नही रहता है. तभी अचानक से घडी मे एक आवाज होती है वो घडी मे देखता है तो रात के 9 बज चूके थे. तभी अद्विक के माँ की आवाज आती है अद्विक बेटा खाना लग चुका है आजा जल्दी से. तब अद्विक वो किताब बेड पे रख देता है और खाना खाने चला जाता है. थोडी देर बाद अद्विक खाना खाके अपने कमरे मे लौटता है और उस किताब को देखने लगता है. किताब पढने के बाद तो उसे वो तसवीर अब और भी अच्छी लगने लगी थी. बनाने लग जाता है. अद्विक अपना पुरा होश खोकर पुरे जी जान से वो पेंटिंग बना रहा था. रात के लगबग 3 बज गये थे अद्विक के कमरे की लाईट्स अभी भी ऑन थी. पेंटिंग अब लगबग बन चुकी थी. अब बस उसकी आँखे बनाना बाकी रह गया था. थोडी देर मे वो उस पेंटिंग की आँखे भी बना देता है और देखते ही देखते पेंटिंग पुरी हो जाती है. पेंटिंग को देखकर अद्विक बहुत खुश था क्यों की आजतक उसने ऐसी बहुत सारी पेंटिंग बनायी थी लेकिन ये कुछ अलग ही थी. इसमे कुछ तो अलग बात थी.अद्विक ने ये पेंटिंग बनाने के लिये अपनी पुरी जान डाल दी थी. लेकिन अद्विक को अब बहुत नींद आ रही थी. इसलिये वो अपने कमरे की लाईट्स बंद कर देता है और बेड पे लेट जाता है. बेड पे लेटते ही थकान के कारन उसकी आंख लग जाती है और थोडी देर मे ही वो गहरी नींद सो जाता है. अंधेरे मे वो पेंटिंग किसी जिंदा इन्सान से कम नही लग रही थी. अंधेरे मे उसकी लाल आँखे और भी खौफनाक लग रही थी ऐसा लग रहा था जैसे वो अद्विक को घुरे जा रहा है जैसे वो खून का प्यासा है.
सुबह हो जाती है. पता नही कैसे लेकिन रोज देर से उठने वाला अद्विक आज सुरज की पहली किरन उस तक पहुचे इससे पहले तैयार हो गया था. सुबह के 7 बज गये थे. अद्विक नहाकर तैयार हो गया था और वो अपना लॅपटॉप लेकर उसपर कुछ कर रहा था. वो लॅपटॉप मे एक वेबसाईट पे अपनी बनायी हुयी पेंटिंग अपलोड कर रहा था.उसने कालचक्षु की पेंटिंग का फोटो वेबसाईट पे अपलोड कर दिया. तभी अद्विक की माँ रोज की तरह उसे उठाने के लिये उसके कमरे मे आ जाती है और अद्विक को तैयार देख चौक जाती है और कहती है बेटा तू इतनी जल्दी कैसे उठ गया आज? तेरी तबियत तो ठीक है ना. रोज तो खराटे मारते हुये देर तक सोता रहता है. आज इतने जल्दी नहा धोके तैयार. क्या बात है? तब अद्विक कहता है कुछ नही माँ ऐसे ही और आपको तो मै देर तक सोऊ तब भी प्रॉब्लेम है और सुबह जल्दी उठ जाऊ तब भी प्रॉब्लेम है. तब अद्विक की माँ कहती है नही बेटा मै तो मजाक कर रही थी. अच्छा चल तेरे लिये नाश्ता बना देती हू. कम से कम आज तो नाश्ता करके कॉलेज जा. इतना कहके वो जाने ही वाली थी की तभी उनकी नजर उस कौने मे लगी पेंटिंग पे पडती है और वो अद्विक से कहती है अब ये महाशय कौन है? अब और एक अजीब पेंटिंग बनादी तुने. ये तो और भी ज्यादा डरावनी है. आँखे तो देखो उसकी ऐसा लग रहा है जैसे अब बाहर आके निगलही लेगा. तब अद्विक कहता है माँ आप फिर शुरु हो गयी. तभी अद्विक की माँ कहती है ठीक है बेटा मै समझ गयी मै कुछ नही कहुंगी तेरी पेंटिंग को.इतना कहकर वो कमरे से बाहर चली जाती है. वो सीढीयों से नीचे उतर ही रही थी की तभी पैर फिसलकर वो नीचे गीर जाती है और चिल्लाने लग जाती है हाये मेरा पैर, मर गयी मेरा पैर.अपनी माँ की चिल्लाने की आवाज सुनकर अद्विक बाहर आ जाता है और देखता है की उसकी माँ सीढीयों से नीचे गिर गयी है वो जल्दी से जाके अपनी माँ को उठाता है और सोफे पे बिठाते हुये कहता है क्या माँ ध्यान कहा होता है आपका? जरा देखकर चला किजिये ना. ज्यादा दर्द तो नही हो रहा ना नही तो हम डॉक्टर के पास चलते है चलो. तब अद्विक की माँ कहती है नही डॉक्टर के पास जाने की जरुरत नही है बस थोडा मूड गया है ठीक हो जायेगा. तू वो दर्द कम करनेवाला स्प्रे लेकर आ जल्दी. अद्विक जाके वो स्प्रे ले आता है और माँ के पैर पर मारता है जिससे उन्हे थोडा बेहतर महसूस होता है उसके बाद अद्विक माँ को पेनकिलर की दवाई दे देता है और आराम करने के लिये कहता है. जाते जाते वो अपने कमरे से कालचक्षु की किताब ले लेता है और अपनी बॅग मे डालता है और कॉलेज के लिये निकल जाता है. कॉलेज पहुचकर वो कालचक्षु की किताब काव्या को दे देता है. काव्या वो किताब लेकर अपने बॅग मे रखते हुये कहती है अरे वा इतनी जल्दी तुमने ये किताब पढ भी ली. तब अद्विक मुस्कुराते हुये कहता है हा बहुत अच्छी किताब थी इसलिये आगे पढने से खुद को रोक ही नही पाया. तभी उसका फोन बजता है. अद्विक अपना फोन निकालता है और देखता है की किसी unknown नंबर से उसे फोन आ रहा था. अद्विक फोन उठाता है और बात करता है तभी उधर से आवाज आती है हॅलो मै राकेश भाटिया बात कर रहा हू “हाँटेड रिसॉर्ट” इस टीव्ही शो का डायरेक्टर. आप अद्विक शर्मा ही बात कर रहे है ना. तब अद्विक कहता है हा बोल रहा हू तब वो डायरेक्टर कहता है जी आपने जो पेंटिंग आज अपलोड की है ना वेबसाईट पे वो हमे अपने टीव्ही शो के लिये चाहिये, क्या वो आप हमे बेच सकते है? तब अद्विक खुश होते हुये कहता है जी सच मे वो पेंटिंग आप खरीदना चाहते है. तब वो डायरेक्टर कहता है जी सच मे. हमे वो पेंटिंग बहुत पसंद आयी है. दरसल हमारा शो एक हॉरर शो है ना और आपकी वो पेंटिंग लाजवाब है. हमे उसकी जरुरत है. क्या वो आप हमे बेच सकते है. तब अद्विक कहता है जी सर जरूर. तब वो डायरेक्टर कहता है मै आपको एक ऑफर देना चाहता हू. क्या आप हमारे टीव्ही शो के सेट पे आना पसंद करेंगे. एक दिन के लिये आप हमारे मेहमान होंगे. उसी बहाने हमारी जानपहचान भी हो जायेगी. अद्विक थोडा सोचते हुये कहता है जी जरूर. तब वो डायरेक्टर कहता है मै आपको एक पता भेज देता हू आप कल उस पते पे पहुच जाईये. तब अद्विक कहता है जी ठीक है. इतना कहकर दोनो फोन रख देते है. थोडी ही देर मे अद्विक के फोन पर उस जगह का address आ जाता है. अद्विक की खुशी फुली ना समा रही थी. वो खुशी के मारे जोर से चिल्लाता है. अद्विक को इतना खुश देख उसके दोस्त उससे पूछते है की क्या हुआ? तब अद्विक उन्हे सारी बात बता देता है और कहता है देखा मै ना कहता था एकदिन कोई ना कोई जरूर खरीदेगा मेरी पेन्टिंग्स को.अद्विक को खुश देख उसके दोस्त भी खुश हो गये थे. तब अद्विक उसके दोस्तो को सारी बात बता देता है और उसके साथ वहा चलने के लिये कहता है. काव्या पहले मना करती है लेकिन अद्विक के रिक्वेस्ट करने पर उसके साथ चलने के लिये मान जाती है. तभी रोहित कहता है लेकिन जाना कहा है? तब अद्विक कहता है “प्रतापगढ”.
घर आके अद्विक अपनी माँ को सब बता देता है. पहले उसकी माँ उस बात के लिये मना कर देती है लेकिन अद्विक के रिक्वेस्ट करने पर वो मान जाती है. खाना खाके अद्विक अपने कमरे मे आ जाता है और उस पेंटिंग को देख कहता है यार तू तो मेरे लिये बहुत लकी है. तेरी पेंटिंग बनाई और मेरी पेंटिंग के लिये ऑर्डर भी आ गयी. तुने तो मेरी लाईफ बना दी. थँक यू सो मच. अद्विक कल के लिये बहुत excited था और उसी excitement वो अपने कमरे की लाईट्स बंद कर सो जाता है.रात के अंधेरे मे वो आँखे अपनी पलके झपकाती है जैसे वो जिंदा हो.
अगली सुबह जल्दी उठकर अद्विक तैयार हो जाता है और उस पेंटिंग को ठीक से फ्रेम करवाता है और उसे पॅक करता है और अपनी बॅग लेता है. अद्विक अपना सामान लेकर नीचे हॉल मे आता है. अद्विक की माँ टेबल पर उसके लिये नाश्ता ही लगा रही थी. अद्विक और उसकी माँ साथ मे नाश्ता करते है. अद्विक अपनी माँ का आशीर्वाद लेता है और अपना ध्यान रखने के लिये कहता है. अद्विक रोहित को फोन लगा ही रहा था की तभी अचानक से गाडी का हॉर्न बजता है अद्विक बाहर देखता है तो रोहित उसकी जीपसी मे काव्या, प्रिया और कृतिका को लेकर आ गया था. अद्विक अपनी माँ को बाय कहकर अपने दोस्तो के साथ प्रतापगढ के लिये निकल जाता है. अद्विक की माँ को अद्विक की बहुत चिंता हो रही थी.
अद्विक और उसके दोस्त प्रतापगड के लिये निकल जाते है. रास्ते मे रोहित अद्विक से पूछता है की यार जरा रास्ता तो बताना प्रतापगड का. तब अद्विक कहता है यहा से मतलब जयपूर से प्रतापगड 465 किलोमीटर की दुरी पर है. चित्तोडगड के आगे आमलावाडा शहर है उसके नजदिक ही प्रतापगड है वही जाना है हमे. तब रोहित कहता है 465 किलोमीटर मतलब कम से कम 6-7 घंटे तो लगेंगे. तो हमे बीच मे कही रुकना पडेगा खाना खाने के लिये. तब अद्विक कहता है हा हा रुकेंगे ना लेकिन अभी तो चल.6-7 घंटे का सफर कर अद्विक और उसके दोस्त आंखिरकार प्रतापगड पहुच जाते है. वहा जाके वो कुछ लोगों से वहा का पता पूछ लेते है और उस पते पे पहुच जाते है. वो एक बहुत बडा five स्टार रिसॉर्ट था. सामने गार्डन और एक बडा सा स्विमिंग पुल भी था. गाडी से उतरते ही रोहित कहने लगता है यार कितना बडा रिसॉर्ट है और बहुत बडिया भी है. प्रिया और कृतिका भी रिसॉर्ट की तारीफ करते नही थक रही थी. उस रिसॉर्ट के बाहर गेट पे एक बोर्ड लगा हुआ था.जिसपे लिखा था सूचना यहा आना मना है. यहा पे एक टीव्ही शो की शूटिंग शुरु है और उस गेट के पास एक सिक्युरिटी गार्ड भी खडा था. अद्विक और उसके दोस्त को अंदर आता देख वो उन्हे रोकता है और कहता है कहा जा रहे साब? यहा पे लगा बोर्ड नही दिख रहा? यहा आना मना है यहा पे एक टीव्ही शो की शूटिंग शुरु है. तब रोहित कहता है अरे वो टीव्ही शो के डायरेक्टर सर ने ही हमे बुलाया है. लेकिन वो सिक्युरिटी गार्ड फिर भी उन्हे अंदर आने नही दे रहा था. तब अद्विक उस डायरेक्टर को फोन करता है और उसके आने की खबर देता है. तब उस सिक्युरिटी गार्ड का फोन बजता है और वो फोन उठाता है. वॉचमन फोन रखकर वो गेट खोल देता है और उन्हे अंदर जाने के लिये कहता है. सभी लोग अंदर जाते है. रोहित अंदर जाते जाते उस गार्ड को चिडाते हुये अपनी छाती आगे निकालता है और अपने बालो पर से हात घुमाते हुये अंदर चला जाता है. अद्विक और उसके दोस्त बहुत खुश थे और excited भी थे. काव्या खुश थी लेकिन वो अभी भी खामोश थी. पता नही लेकिन क्यूँ सुबह से लेकर अबतक उसे जरा भी बेहतर महसूस नही हो रहा था. तभी वहा एक आदमी आ जाता है. जो की उस टीव्ही शो का डायरेक्टर था. अद्विक और उसके दोस्तो को देखकर उनका स्वागत करता है और कहता है आईये आईये सर. स्वागत है आपका. हमे कबसे आपही का इंतजार था. अद्विक भी उसे एक अच्छी सी स्माईल देते हुये उसका शुक्रिया अदा करता है तब वो डायरेक्टर रिसॉर्ट के मॅनेजर को अद्विक और उसके दोस्तो के रूम्स की चाबी उन्हे देने के लिये कहता है और उन्हे फ्रेश होने के लिये कहता है.
थोडी देर बाद अद्विक और उसके दोस्त फ्रेश होके रिसॉर्ट के हॉल मे आ जाते है और सोफे पे बैठ जाते है. जहाँ शूटिंग के लोग थे और उनकी इधर से उधर भागा दौडी चल रही थी. सामने ही एक कोने मे एक सुंदर सी लडकी आयने मे देख अपने बाल सवार रही थी और अपने मूह पे लिपस्टिक लगा के अपने लिप्स को बार बार देखे जा रही थी. देखने से तो वो उस शो की मेन हिरोईन लग रही थी. दुसरी ओर एक लडका अपने बाल आयने मे देख ठीक रहा था. शायद वो उस शो का हिरो था और बाकी सब वहा काम करने वाले लोग और मेकअप अप आर्टिस्ट थे रोहित, कृतिका, प्रिया बहुत excited थे. उन्हे वो सब देख बहुत अच्छा लग रहा था. अद्विक भी खुश था क्यों की आज उसकी बनाई पेंटिंग पहली बार किसीने इतनी पसंद की थी और वो भी एक पॉप्युलर टीव्ही शो के लिये. तभी वहा पे वो डायरेक्ट आ जाता है और एक announcement करता है की excuse me ladies and gentlemen’s इधर ध्यान दीजिये. आज हमारे लिये बहुत खास दिन है. आज हमारे टीव्ही शो ने 100 एपिसोडस पुरे किये है और हमारा टीव्ही शो इतने कम वक्त मे बहुत पॉप्युलर हो गया है. लोग पागल हो चुके है हमारा टीव्ही शो देख के तो ये आप सब की भी मेहनत है. आप सब का तह दिल से शुक्रिया और हा आज के दिन की खास announcement आज हमारे साथ हमारे सेट पे कुछ खास मेहमान है. जो एक बहुत बडे आर्टिस्ट है जिन्होने हमारे शो के लिये बहुत बडिया पेंटिंग बनाई है. आज हम उस पेंटिंग का इनोग्रेशन करने वाले है और साथ ही आज एक दिन के लिये ये हमारे साथ होंगे. ये सुनकर सब तालिया बजाने लगते है.
अद्विक डायरेक्टर के पास जाता है और उसे वो पेंटिंग दे देता है. फोटोग्राफर फोटो खिचता है. थोडी देर बाद वो डायरेक्टर उस पेंटिंग को खोलता है और उसे देख बहुत खुश होता है और कहता है amazing और मुस्कुराते हुये सब के सामने अद्विक को एक लाख का चेक दे देता है. अद्विक को खुश देख काव्या भी बहुत खुश थी क्यों की वो मन ही मन अद्विक को पसंद करती थी. थोडी देर बाद डायरेक्टर उसके काम करने वाले लोगों को वो पेंटिंग वहा एक दिवार पे लगाने के लिये कहता है और अद्विक से कहता है आज हमारे लिये बहुत बडी achievement है और उसे हम celebrate कर रहे है और उसकी खुशी मे ये ड्रिंक्स. तब अद्विक उसे मना करते हुये कहता है थँक यू सर पर मै ड्रिंक नही करता. मेरे दोस्त भी नही. तब डायरेक्टर कुछ बोलता उससे पहले ही रोहित कहता है अरे तू रहने दे मै पी लेता हू. Celebration तो बनता है. डायरेक्टर थोडा मुस्कुराते हुये वहा से चला जाता है. अद्विक रोहित को डाटता है पर रोहित उसकी एक नही सुनता है और वो ड्रिंक पी लेता है. तभी अद्विक की नजर बाल्कनी मे खडे एक इन्सान पे पडती है जो इन सबसे दूर बाल्कनी मे खडे होके बाहर का नजारा देख कुछ सोच रहा था.उसे देख अद्विक को थोडा अजीब लगता है क्यों की वहा पर सभी लोग पार्टी मे मौजमस्ती कर रहे थे और वो एक इन्सान अकेले उस भीड से दूर जाके खडा बाहर देख कुछ सोच रहा था. अद्विक उस आदमी के पास चला जाता है और उसके बगल मे जाके खडा हो जाता है. फिर भी उस आदमी का ध्यान अद्विक की तरफ नही जाता वो किसी सोच मे डुबा हुआ था. तब अद्विक उस आदमी से कहता है क्या आपको पार्टी बोरिंग लग रही है? तब वो आदमी अद्विक की तरफ देखता है और कहता है नही तो ऐसा कुछ नही है आपको ऐसा क्यूँ लगा?. तब अद्विक कहता है पार्टी तो उधर चल रही है और आप यहा अकेले खडे है इसलिये पूछा. तब वो आदमी मुस्कुराते हुये कहता है नही नही ऐसी कोई बात नही वो दरसल मै हरवक्त कुछ सोचता हू और लिखता रहता हू. तब अद्विक कहता है अच्छा तो आप लेखक है. तब वो आदमी मुस्कुराते हुये कहता है हा सही पहचाना. मै एक लेखक हू. ये टीव्ही शो भी मैने ही लिखा है. ये सुनकर अद्विक चौक जाता है और कहता है क्या कहा ये शो आपने लिखा है? Interesting. क्या मै आपका नाम जान सकता हू तब वो आदमी कहता है मेरा नाम अभिमन्यू रहेजा है. तब अद्विक जरा सोचते हुये कहता है एक मिनिट एक मिनिट ये नाम मैने पहले भी कही पढा है. थोडा अपने दिमाग पे जोर डालते हुये अद्विक याद करने की कोशिश करता है है और थोडी देर बाद उसे याद आता है हा याद आया आप वही है ना जिन्होने “कालचक्षु”की किताब लिखी है. तब अभिमन्यू मुस्कुराते हुये कहता है हा मैने ही लिखी है. आपने पढी क्या?तब अद्विक कहता है हा बहुत अच्छी थी और डरावनी भी. मैने तो एक रात मे ही पुरी पढ ली और तो और आपके किताब के उपर जों तसवीर थी उसकी ही पेंटिंग मैने बनाई है. तब अभिमन्यू कहता है शुक्रिया मेरी तारीफ करने के लिये. अच्छा तो आप एक पेंटिंग आर्टिस्ट है. अच्छा है हम एक लेखक जो अपने शब्दो से किरदार जिंदा करते है और आप अपनी कला से बढिया है. हमारी बहुत जमेगी फिर. तब अद्विक कहता है लेकिन सर आपने उस कहानी का अंत नही लिखा है या फिर आप लिखना भूल गये तब अभिमन्यू थोडा हसते हुये कहता है अरे हम लिखना कैसे भूल सकते है? कुछ कहानिया कभी खतम नही होती बस दफन हो जाती है और फिर किसी के कुरेदने से वो बाहर आ जाती है. अभिमन्यू की बात सुनकर अद्विक हैरान हो गया था. तब वो कहता है है अच्छा ये सब बाते तो होती रहेगी आईये मै अपने दोस्तो से मिलवाता हू आपको. इतना कहकर वो अपने दोस्तो को आवाज देता है और इशारे से ही उसकी तरफ आने के लिये कहता है. थोडी देर मे ही उसके दोस्त वहा आ जाते है. तब अद्विक उसके दोस्तो को और अभिमन्यू को एकदुसरे से मिलाता है. अभिमन्यू से मिलकर काव्या बहुत खुश हो गयी थी क्यों की वो उनकी बहुत सी किताबे पढ चुकी थी. और हाल ही मे उसने कालचक्षु की किताब पढने के लिये लायी थी. अभिमन्यू को देख काव्या कहती है सर मै आपकी बहुत बडी फॅन हू. आपकी बहुत सारी किताबे पढी है मैने और अभी एक और लायी हु पढने के लिये. आप बहुत अच्छा लिखते है सर. ये सुनकर अभिमन्यू मुस्कुराते हुये काव्या का शुक्रिया अदा करता है. अभिमन्यू की उम्र लगबग 35 से 40 साल तक थी इसलिये वो अद्विक और उसके दोस्तो मे comfortable था और उसे भी उनकी company अच्छी लग रही थी. तभी डायरेक्टर अद्विक के पास आता है और कहता है आप सब खाना खा लिजिए हम रात मे शूटिंग करते है ताकी हॉरर सीन्स और भी रिऍलिस्टिक लगे. तब अद्विक ठीक है कहकर सबको खाना खाने के लिये लेकर जाता है. अभिमन्यू भी उनके साथ चला जाता है. इधर डायरेक्टर ने वो कालचक्षु की पेंटिंग हॉल मे दिवार पे लगवायी थी. सीरियल के सीन की तैयारी हो रही थी. रात के लगबग 11.30 बज गये थे. अद्विक और उसके दोस्त खाना खाके नीचे हॉल मे ही आ रहे थे. अभिमन्यू भी उनके साथ ही था की अचानक रिसॉर्ट की सारी लाईटे ऑन ऑफ होने लगी. तेजी से हवा बहने लगी हवा बहने के कारन सब कुछ इधर उधर बिखर रहा था. खिडकीयो के पडदे हवा मे उडने लगे थे और खिडकीया जोर जोर से आवाज करने लगी थी. अचानक ये सब क्या हो रहा है ये सोचकर सभी लोग हैरान हो गये थे. अद्विक और उसके दोस्त भी बहुत घबराये हुये थे. थोडी देर बाद अचानक से रिसॉर्ट की सारी लाईट्स बंद हो जाती है और चारोतरफ अंधेरा छा जाता है. अंधेरा होने के कारन सभी लोग डर जाते है. प्रिया और कृतिका जोर से चिल्लाती है. तभी अभिमन्यू कहता है अरे डरो मत जरूर शॉर्टसर्किट हो गया होगा इसलिये ऐसा हुआ. तब डायरेक्टर अंधेरे मे उसके काम करने वाले लोगों को आवाज देता है और कहता है अरे लाईट्स को क्या हुआ देखो जरा? जाओ जल्दी.. वो अपना फोन निकालता है और रिसॉर्ट के मॅनेजर को फोन कार सब कुछ बताता है.
चारोतरफ अंधेरा छाया हुआ था. कालचक्षु की तसवीर जो दिवार पे लगी हुयी थी वो अचानक से हिलने लगती है और एकतरफ से निकलकर टेढी होकर दिवार पर लटकने लग जाती है उसमे से एक काला साया बाहर आ जाता है जिसकी लाल आँखे अंधेरे मे भी साफ दिखाई दे रही थी. उधर अद्विक उसके दोस्त अपने मोबाईल का टॉर्च ऑन करते है और इधर उधर देखने लग जाते है. तभी अभिमन्यू कहता है चलो हम रोशनी करने के लिये कॅण्डल्स मिलती है क्या देखते है?अभिमन्यू की बात सुनकर सभी मोबाईल की टॉर्च की रोशनी मे अपने कमरे मे चले जाते है और कॅण्डल्स ढुंढने लग जाते है. बहुत ढुंढने के बाद उन्हे कॅण्डल्स मिल जाती है और वो उसे जलाते है. कॅण्डल्स जलाने की वजह से थोडी रोशनी हो जाती है और वो उस कॅण्डल की रोशनी मे आगे बढने लगते है प्रिया, कृतिका, काव्या डरते हुये एकदुसरे का हात पकडकर चल रही थी उन्हे ऐसे डरते देख रोहित की हसी नही रुक रही थी और वो उनका मजाक उडाते हुये कहता है अरे ये देखो ये तीनो कितना डर रही है और हमारे साथ हॉरर शो की शूटिंग देखने आयी है.तब अद्विक उसे चूप करते हुये कहता है रोहित यार ये मजाक का वक्त नही है देख चारोतरफ कितना अंधेरा है और कितना सन्नाटा है ऐसे मे तो कोई भी डर जायेगा.. तब रोहित कहता है तुम लोग डरते होंगे मै नही डरता किसीसे. अंधेरे मे कही से भूत आ जायेगा क्या. भूत वूत कुछ नही होता.तब अभिमन्यू उसे जवाब देते हुये कहता है होते है बस हम उनपे यकीन नही करते. हमारे चारोतरफ वो हमेशा मौजूद होते है. हम बस उन्हे देख नही पाते. अभिमन्यू की बात सुनकर रोहित फिर से हसने लगता है और अभिमन्यू का मजाक उडाते हुये कहता है होते होंगे भूत लेकिन आप की कहानीयो मे असल जिंदगी मे ऐसा कुछ नही होता. तब अभिमन्यू मुस्कुराते हुये कहता है कहानिया इन्सान ही लिखता है. और कहानिया यूही नही बनती उनके पीछे कोई ना कोई वजह होती है. जाने दो तुम नही समझोगे. ये सुनकर रोहित को गुस्सा आ जाता है और वो कहता है तुम लोग जाओ मै जाता हू अकेले. तुम लोगों के साथ एक मिनिट और रहा ना तो पागल हो जाऊंगा. तब अभिमन्यू कहता है नही हम सबको एकसाथ रहना चाहिये. तब अद्विक भी कहता है हा रोहित तुम कही नही जाओगे. तब रोहित कहता है मै तुम लोगों की अब एक नही सुनूंगा मै चला. जाओ तुम लोग वैसे भी बहोत बोर कर रहे हो. रोहित अपने मोबाईल की टॉर्च ऑन कर वहा से चला जाता है. अद्विक उसे पीछे से आवाज देके रोकने की कोशिश करता है लेकिन वो उसकी एक नही सुनता है. सभी कॅण्डल्स की रोशनी मे हॉल के उपर वाले सीढीयो पे आते है. तभी अद्विक कहता है अरे लाईट्स गये इतनी देर हो गयी लेकिन किसी ने लाईट्स नही जोडी अब तक और किसी की आवाज भी नही आ रही है नीचे से. आंखिर क्या बात है? कही सब लोग यहा से चले तो नही गये. तब अभिमन्यू कहता है हा मुझे भी ये थोडा अजीब लग रहा है लेकिन पहले हमे लाईट्स के मेन स्विच के पास जाना चाहिये और लाईट्स ऑन होती है या नही देखना चाहिये. तब अद्विक कहता है हा ये सही रहेगा. तब सभी लोग रिसॉर्ट के बाहर गार्डन के बाई ओर जो पॉवर हाऊस था उसकी तरफ बढने लगते है.
उधर रोहित बडबडाते हुये रिसॉर्ट के पीछेवाले गार्डन मे चला जाता है. आते आते अंधेरे मे उसे एक व्हिस्की की बॉटल मिल गयी थी जो वो लेके आ गया था. रोहित गार्डन मे रखी कुर्सी पे बैठता है और व्हिस्की के बॉटल का ढक्कन खोलते हुये कहता है बेकार मे बोर कर रहे थे और क्या कह रहे थे? हा भूत होते है और हमारे आसपास होते है हम उन्हे देख नही पाते. अरे जाओ मै नही डरता किसी भूत वूत से. यार किस सदी मे जी रहे ये लोग? और तो और अद्विक भी उसके साथ शुरु हो गया. जाने दो जब तक लाईट्स नही आती तब तक यही बैठ के मजे करता हू.तभी उसे अपने बगल मे किसी के होने का एहसास होता है. काफी अंधेरा होने के कारन उसे ठीक से कुछ नही दिखाई दे रहा था.अंधेरे मे बस उसकी लाल आँखे धुंदली दिखाई दे रही थी. इसलिये अद्विक अपने मोबाईल की टॉर्च ऑन करता है और उसकी रोशनी मे देखते हुये कहता है कौन है भाई? तुझे भी किसी ने बोर किया क्या? इसलिये यहा आये हो. इतना कहकर रोहित हसने लगता है. लेकिन उस आदमी का कोई जवाब ना आता देख रोहित कहता है अब आये हो तो बैठ जाओ. लेकिन तुझे व्हिस्की नही मिलेगी ये सिर्फ मै पिऊंगा. वो काला साया अभी भी वही खडा होके रोहित को घुर रहा था. रोहित उसे कुछ जवाब ना देता देख गुस्सा हो जाता है और कहता है अरे ये बैठना है तो बैठ वरना निकल यहा से. मुझे डिस्टर्ब मत कर. वैसे ही मेरी पहले ही सटक चुकी है अब तू दिमाग मत खराब कर लेकिन फिर भी वो काला साया अभी भी वही खडा था. तब रोहित अपनी जगह से उठते हुये कहता है रुक तू ऐसे नही मानेगा . इतना कहकर वो उस काले साये की तरफ जाने लगता है और उसके मोबाईल की टॉर्च मारता है और सामने जो नजारा था वो देख रोहित की चीख निकल जाती है और उसके दोनो आँखो से खून निकलने लगता है. देखते ही देखते थोडी ही देर मे रोहित बेजान होके नीचे जमीन पे गीर जाता है. और वो काला साया वहा से गायब हो जाता है.
उधर अद्विक, अभिमन्यू, काव्या, प्रिया और कृतिका मेन पॉवर हाऊस के पास पहुच गये थे. अद्विक और काव्या ने अपने हात मे कॅण्डल्स पकडी थी.. प्रिया ने अपने हात मे मोबाईल की टॉर्च लगाई थी. अभिमन्यू उस पॉवर हाऊस को खोलता है और देखता है तो उसे एक लाईट का फ्युज मिसिंग लगता है. जो की निकलके वहा नीचे जमीन पे गीरा हुआ था. अभिमन्यू वो जमीन पे पडा हुआ फ्युज उठाता है और उसे सॉकेट मे वापस से लगाता है और लाईट का मेन स्विच ऑन कर देता है वैसे ही चारोतरफ रोशनी हो जाती है. तभी उनकी नजर गेट पे चली जाती है वहा कोई जमीन पे पडा हुआ था. किसी के कुछ समझ नही आ रहा था की क्या हुआ है? इसलिये वो उस आदमी के पास चले जाते है और देखते है तो वो गेट का सिक्युरिटी गार्ड था जो मर गया था और नीचे जमीन पे पडा हुआ था और उसके आँखो से खून निकल गया था. वो देख सभी हैरान हो गये थे.वो देख प्रिया और कृतिका तो रोने लग जाती है. अद्विक और काव्या प्रिया और कृतिका को संभालते है. अभिमन्यू को वो देख किसी चीज का अंदेशा हो गया था इसलिये वो अद्विक और उसके दोस्तो से कहता है चलो जल्दी सब अंदर जाके सबको बताना होगा की यहा पे खतरा है. मुझे यहा कुछ ठीक नही लग रहा. इतना कहकर वो सबको अंदर ले जाता है. हॉल मे पहुचकर वो देखते है तो हॉल मे लाशो के ढेर नजर आ रहे थे. हॉल मे जितने भी लोग थे वो सारे मर गये थे और उनकी हालत भी वैसी ही थी. उनके भी आँखो से खून बह रहा था. वो देख अभिमन्यू,अद्विक और उसके दोस्त चौक जाते है. प्रिया और कृतिका ने तो डर के मारे अपनी आँखे बंद कर ली थी. ऊन लाशो मे उस डायरेक्टर की भी लाश थी. अब वो रिसॉर्ट सच मे हॉरर रिसॉर्ट लग रहा था. अभिमन्यू अपना होश संभालते हुये कहता है मै जो कह रहा हू वो ध्यान से सुनो ये सब नॉर्मल नही है.जरूर यहा कोई काला साया या आत्मा है या फिर कालचक्षु लौट आया है. मै यकीन से तो नही कह सकता लेकिन ये उसी का काम है ये सुनकर अद्विक और उसके दोस्त चौक जाते है और अद्विक कहता है क्या कहा कालचक्षु. वो कैसे आ सकता है? तब अभिमन्यू कहता है वो सब मै तुम्हे बाद मे समझाता हू. पहले तुम लोग अपना सामान लो और चलो यहा से और याद रखना सब लोग साथ रहेंगे और अगर कालचक्षु सामने आया तो उसकी आँखो मे बिलकुल मत देखना वरना हमारी हालत भी इन लाशो की तरह हो जायेगी. अब चलो तभी प्रिया कहता है लेकिन रोहित कहा है? उसे भी बुलाओ. तब अद्विक कहता है हा रुको मै उसे फोन करता हू. इतना कहकर वो अपनी जेब से अपना फोन निकालता है और देखता है की फोन मे नेटवर्क ही नही है. सभी लोग अपना फोन चेक करते है और देखते है की फोन मे नेटवर्क ही नही है. तब अभिमन्यू कहता है की फोन मे नेटवर्क ही नही है अब हमारे पास एक ही रास्ता है हमे रोहित को ढुंढना पडेगा.जैसी यहा की हालत है वो देखकर मै यही दुआ करता हू की वो जहाँ भी हो ठीक हो. इतना कहकर वो रोहित को ढुंढने लग जाते है. बहुत ढुंढने के बाद भी उन्हे रोहित नही मिलता है. रोहित को ढुंढते ढुंढते वो रिसॉर्ट के पीछे वाले दरवाजे पे आ गये थे. तभी अद्विक के मोबाईल मे नेटवर्क आता है वो देख अद्विक कहता है रुको रुको मेरे मोबाईल मे नेटवर्क आ गया मै अभी रोहित को कॉल करता हू. इतना कहकर वो रोहित को कॉल करता है तभी फोन के रिंगटोन बजने लगती है वो आवाज नजदिक से ही कही से आ रही थी. वो आवाज सुनकर अभिमन्यू कहता है ये तो किसी के फोन बजने की आवाज है मतलब रोहित यही कही है.अभिमन्यू रिसॉर्ट के पीछेवाले गार्डन की तरफ इशारा करते हुये कहता है आवाज उस तरफ से आ रही है शायद वो वहा है. चलो. सभी लोग उस रिसॉर्ट के पीछेवाले गार्डन के तरफ चले जाते है और मोबाईल की आवाज कहा से आ रही है ये देखने लगते है. थोडी देर मे उन्हे वो मोबाईल दिख जाता है. अभिमन्यू उस मोबाईल को देख कहता है ये रहा मोबाईल और तभी उस मोबाईल के साईड मे रोहित की बेजान पडी लाश देखकर कहता है ओह नो. इतना कहकर वो अपनी आँखे बंद कर अपना मूह दुसरी ओर फेर लेता है. अद्विक, काव्या, प्रिया और कृतिका सामने का नजारा देखकर अपनी जगह से हिल नही पा रहे थे. उनके पैरो तले से जैसे जमीन खिसक चुकी थी. रोहित की लाश भी उन बाकी के लाशो की तरह ही जमीन पे पडी थी उसके भी आँखो से खून निकल रहा था.तभी अभिमन्यू कहता है जिस बात का डर था वही हो रहा है. अब मुझे पुरा यकीन हो गया है की ये कालचक्षु ही है. वो अद्विक और उसके दोस्तो से कहता है की तुम लोगो पर क्या बीत रही होगी मै समझ सकता हु लेकिन ये वक्त दुःखी होने का नही है. हमे यहा से जल्द से जल्द बाहर निकलना होगा वरना कालचक्षु हमे भी मार डालेगा. चलो यहा से जल्दी. अभिमन्यू उन सबको लेकर रिसॉर्ट के अंदर आता है. तभी उन सब को कालचक्षु का साया इधर उधर घुमते हुये दिखाई देता है. इसलिये अभिमन्यू उन्हे एक कमरे मे लेके चला जाता है और कमरा अंदर से लॉक करता है और सबको चूप रहने के लिये कहता है..
तब अद्विक अभिमन्यू से कहता है की कौन है ये कालचक्षु?और वो हमे क्यूँ मारना चाहता है? आपने किताब मे भी उसका अंत नही लिखा. सर प्लीज बताईये ना. आपको तो सब पता होगा. अद्विक के बार बार जिद करने पर अभिमन्यू कहता है ठीक है सुनो लेकिन मुझे जितना पता है उतना ही मै तुम सबको बता सकता हू. इससे ज्यादा मुझे कुछ नही पता. आजसे चारसो साल पहले यही प्रतापगड मे राजा जयमल का राज था. राजा जयमल एक बहुत अच्छा राजा था. उसके शासन मे कभी किसी पे अन्याय नही होता था. न्याय की परिभाषा ही राजा जयमल था. उसकी एक सुंदर सी बेटी थी राजकुमारी निलांजना. दिखने मे वो बहुत सुंदर थी. वो इतनी सुंदर थी की वो अगर आयने के सामने खडी रही तो मानो ऐसा लगता था अब थोडी देर मे आईना पिघल जायेगा. राजकुमारी रोज अपने बालो मे कमल का फुल लगाती थी. राजा जयमल के दरबार मे उनका एक भरोसेमंद सेनापती था जिसका नाम रायबहादूर था. रायबहादूर एक तगडा, हट्टाकट्टा नौजवान सेनापती था. युद्धकला मे वो निपुन था. जब जब राजा उसे अपने साथ युद्ध मे लेके जाते वो युद्ध जीत जाते इसलिये वो राजा का प्रिय सेनापती हो गया था लेकिन राजदरबार के बाकी लोगो को ये बात जरा भी पसंद नही थी. रायबहादूर को राजकुमारी नीलांजना बहुत अच्छी लगती थी. रायबहादूर को राजकुमारी नीलांजना से प्रेम हो गया था ये बात दरबार के कुछ लोगों के ध्यान मे आ गयी थी इसलिये वो रायबहादूर के खिलाफ एक साजिश रचते है ताकी वो राजा के मन से उतर जाये. एक बार राजकुमारी नीलांजना एक वन मे उसके सखीयों के संग तालाब मे नहाने गयी थी. तब राजदरबार के कुछ लोगों ने रायबहादूर से कहा की राजकुमारी नीलांजना ने उसे वन मे तालाब के पास भेट करने के लिये बुलाया है. रायबहादूर को ये बात सच लगी और खूश होके बिना कुछ सोचे समझे वन मे उस तालाब के पास पहुच गया.
इधर राजदरबार मे कुछ लोगों ने राजा को खबर दी की रायबहादूर राजकुमारी नीलांजना को वन मे जो तालाब है वहा नहाते हुये देखने के लिये गया है. ये सुनकर राजा जयमल अत्यंत क्रोधित हुये और वो खुद इस बात की जाँच करने के लिये उस वन मे पहुच गये और वहा रायबहादूर को राजकुमारी को देखते हुये देख उन्होने अपने सीपाइयों को रायबहादूर को बंदी बनाने का आदेश दिया और राजदरबार मे पेश होने का हुक्म दिया और रायबहादूर की एक बात भी सुने बगैर उन्होने भरे दरबार मे उसकी दोनो आँखो मे तपता हुआ लोहा डाल दिया और उसकी दोनो आँखे निकाल दी. रायबहादूर की चीखे पुरे महल मे गुंज रही थी लेकिन किसी ने उसपे रहम नही खाया और वही रायबहादूर की मौत हो गयी. तब से रायबहादूर की आत्मा प्रतिशोध की आग मे इधर उधर भटक रही है. उसने अपने आप को मरते वक्त कालचक्षु का नाम दे दिया. अभिमन्यू जो बता रहा था वो सब ध्यान से सून रहे थे. तब अद्विक अभिमन्यू से कहता है लेकिन कालचक्षु का मतलब क्या है? तब अभिमन्यू कहता है काल और चक्षु ये दोनो शब्द अलग है. काल तीन प्रकारके होते है वर्तमान, भविष्य और भूत. इन तीनो काल का राजा. और चक्षु मतलब आँखे. वो हमारे तीनो काल मे जा सकता है.
तब अद्विक कहता है लेकिन ये कालचक्षु जिंदा कैसे हो गया? तब अभिमन्यू कहता है याद है तुम्हे जब नीचे पार्टी चल रही थी तब मैने तुमसे क्या कहा था? हम लेखक अपने शब्दों से किरदार जिंदा करते है और पेंटिंग आर्टिस्ट अपनी कला से. जब तुम एक पेंटिंग बनाते हो तो उसमे अपनी पुरी जान डालकर बनाते हो ना. असल मे ये तसवीरे बेजान नही होती ये बहुत कुछ कहती है बस हम इन्हें समझ नही पाते और ऐसे ही तुम्हारे पेंटिंग से कालचक्षु जिंदा हो गया. असल मे वो मरा कभी नही था बस उसे जिंदा होने के लिये तुम्हारे पेंटिंग का रास्ता मिल गया. तब अद्विक कहता है तो क्या मै वो पेंटिंग जला दु? अगर पेंटिंग ही नही रहेगी तो कालचक्षु मर जायेगा. तब अभिमन्यू कहता है तुम्ही ऐसा लगता है की तुम्हारे पेंटिंग जलाने से कालचक्षु मर जायेगा तो ये तुम्हारी गलतपहमी है. कालचक्षू कभी नही मर सकता उसे बस कही दफन किया जा सकता है और वैसे भी कालचक्षु तुम्हे उस पेंटिंग को जलाने नही देगा. तब अद्विक कहता है तो आखिर वो चाहता क्या है तब अभिमन्यू कहता है जहा तक मैने रिसर्च किया था उससे पता चला था की अगर कालचक्षू ने 100 लोगो को मार दिया तो वो हमेशा के लिए अमर हो जायेगा और इसलिए वो ये सब कर रहा है. तब अद्विक कहता है तो अब हम क्या करे? तब अभिमन्यू कहता है इससे ज्यादा मै कुछ नही जानता. थोडा रुको मुझे सोचने दो की उसे कैसे रोका जा सकता है? पेंटिंग तो वो नष्ट नही करने देगा. थोडा सोचने के बाद अभिमन्यू को एक रास्ता मिल जाता है वो अद्विक से कहता है एक रास्ता है अगर तुम उस कालचक्षू की पेंटिंग मे जो उसकी आखे बनाई है वो मिटा दो तो कालचक्षू हमेशा के लिए दफन हो जायेगा. तब अद्विक कहता है लेकिन आपने अभी तो कहा ना कि वो मुझे वहा पर पहुचने नही देगा तो फिर.तब अभिमन्यू कहता है जब तक तुम उस पेंटिंग की आखे मिटा देते हो तब तक हम उसे रोक कर रखेंगे. तब अद्विक कहता है लेकिन इस मे तो खतरा है. तब अभिमन्यू कहता है अब थोडा खतरा तो उठाना पडेगा.
प्रिया को ये सारी बाते ठीक नही लग रही थी इसलिये वो कहती है तुम लोग यही बैठो और उस कालचक्षू को मारने की तरकीब सोचते रहो. मै जा रही हू. अगर यहा और थोडी देर रही तो तुम लोगो के साथ मै भी मर जाऊंगी. प्रिया कृतिका से कहती है कृतिका तू चल रही है मेरे साथ. तब काव्या कहती है प्रिया ये कैसी बाते कर रही है तू? और बाहर मत जा बाहर खतरा है. हमे एक साथ रहना चाहिए. कृतिका का भी प्रिया से यही कहती है. अभिमन्यू भी प्रिया को समझाने की कोशिश करता है लेकिन वो नही मानती और रूम का दरवाजा खोल के बाहर चली जाती है. अद्विक उसे रोकते हुए उसके पीछे पीछे रूम के बाहर चला जाता है तभी अभिमन्यू उसे रोकते हुए कहता है नही अद्विक बाहर मत जाओ वरना कालचक्षु हमे मार डालेगा. उसे जाने दो. प्रिया बडबडाते हुये तेजी से हॉल की तरफ बढ रही थी की तभी अचानक हॉल की सारी लाईट्स बंद चालू होना शुरू हो जाती है. प्रिया अपनी जगह पर ही रुक जाती है. डर के मारे उसके माथे पे पसीना आ जाता है. हो घबराते हुये इधर उधर देखने लगती है अब जाके उसे अपनी गलती का एहसास हो गया था की उसने रूम से बाहर निकल कर कितनी बडी गलती की है लेकिन अब बहुत देर हो गई थी. वो वापस जाने के लिए पीछे मुडती तभी उसके पीछे कालचक्षू आके खडा हो जाता है. उसे देख प्रिया जोर से चिल्लाती है. प्रिया की चीख अद्विक और उसके दोस्तो को सूनाई देती है. प्रिया की चीख सुनकर अद्विक कहता है सर हमे प्रिया को बचाना होगा. मै अपने दोस्तों को मरते हुए नही देख सकता. मे जा रहा हु उसे बचाने. तब अभिमन्यू कहता है पागल मत बनो अद्विक तुम्हे नही पता कालचक्षू कितना ताकदवर है और वो कोई इंसान नही है की हम उससे लड सके. हमे बहुत चालाखी से काम लेना होगा. तब अद्विक कहता है लेकिन प्रिया. तब अभिमन्यू कहता है अब बहुत देर हो गयी है अद्विक हम कुछ नही कर सकते. तब अद्विक कहता है नही मै ऐसा नही होने दुंगा. अद्विक को कुछ ना सुनता देख अभिमन्यू कहता है ठीक है लेकिन मे जैसे बताता हु वैसे करना.अद्विक तुम अपने पेंटिंग का सामान लेना और उस कालचक्षु की पेंटिंग के पास जाना और उसकी आखे मिटा देना लेकिन तुमसे पहले मै बाहर जाऊंगा और कालचक्षु को रोकने की कोशिश करूँगा. तब तक काव्या और कृतिका तुम कमरा नंबर 201 के पास एक राख का गोल चक्र बनाना. वो राख मै तुम्हे देता हु. तब तक मै कालचक्षु को ऊस चक्र के पास लेके आता हु. एक बार कालचक्षू उस चक्र के अंदर आ गया तो उस चक्र के बाहर नही जा पायेगा और अद्विक तुम हॉल मे जाके कालचक्षु के पेंटिंग की आखे मिटा दे ना. तब अद्विक कहता है लेकिन ये राख कैसी है? तब अभिमन्यू कहता है ये यहा के शिव मंदिर की भभूती है जिसमे यज्ञ की पवित्र राख मिलाई है. मे अक्सर इसे अपने पास रखता हु ताकी शैतानी शक्तीया मुझसे दूर रहे पर ये ज्यादा देर उसे रोक नही पायेगी. इसलिये तुम्हारे पास बहुत कम वक्त है और याद रखना उसकी आखो मे कोई भी नही देखेगा चाहे कुछ भी हो जाये. इतना कहकर अभिमन्यू अपने बॅग से एक थैली निकालता है जिसमे वो राख होती है. वो थैली वो काव्या और कृतिका को देता है और कमरे से बाहर चला जाता है. अभिमन्यु हॉल की सीढीयों के पास पहुच जाता है जहा पर प्रिया की लाश पडी हुई थी जिसकी आखो से खून बह रहा था. उधर अद्विक अपने पेंटिंग का सारा सामान लेता है. तभी उधर हॉल की लाइट्स बंद चालू होना शुरू हो जाता है. लाईट्स को बंद चालू होता देख अभिमन्यू समझ जाता है की कालचक्षू उसके आस पास है और वो उसे भटकाने के लिए कहता है मे डरता नही हु तुझसे समझा. अगर हिम्मत है तो सामने आके वार कर. ऐसे बुझदिलो की तरह पीछे से क्या वार करता है. तभी उसके सामने एक काला साया आ जाता है. उसे देख अभिमन्यू अपनी आँखे दूसरी ओर कर लेता है. उधर काव्या और कृतिका रूम नं 201 के पास जाने लगती है. इधर कालचक्षु आके अभिमन्यू के सामने खडा हो जाता है और कहता है क्या कहा तुने तू मुझसे नही डरता. अगर हिम्मत है तो मेरी आँखो मे देख. देख मेरी आँखो मे. उधर काव्या और कृतिका कमरा नं 201 के पास पहुच जाती है जो की अभिमन्यू के पीछे कुछ ही दुरी पर था. काव्या और कृतिका वो थैली खोलके उसमे से वो राख निकालती है और उससे जमीन पर गोल चक्र बनाने लग जाती है. इधर अभिमन्यू कालचक्षु से कहता है अगर तुझे अपने आप पर इतना घमंड है तो मै तुझसे पाच सवाल पुछुगा उसके हर एक सही जवाब के साथ तू एक कदम आगे बढेगा अगर जवाब गलत हुआ तो तू मुझे नही मारेगा. तब कालचक्षु कहता है ठीक है पूछ आज तो तू मेरे हातो से मरेगा. उधर काव्या और कृतिका राख से पुरा गोल चक्र बना देती है और वापस कमरे मे चली जाती है. उधर अभिमन्यू जानबूझके कालचक्षु से आसान सवाल पूछता है ताकी उनका प्लॅन कामियाब हो जाये. कालचक्षु पाचों सवालों का सही जवाब देते हुये आगे बढते बढते उस चक्र के अंदर आ जाता है. उस चक्र मे आने के बाद कालचक्षु को अजीब सा महसूस होने लगता है वो आगे नही बढ पा रहा था. कालचक्षु नीचे देखता है तो उसे राख का चक्र दिख जाता है. कालचक्षु चिल्लाते हुये कहता है धोका दिया तुमने मुझे. अब मै तुम्हे जिंदा नही छोडुंगा.तब अभिमन्यू अद्विक को आवाज देता है. अद्विक अपने पेंटिंग का सामान लेकर नीचे हॉल की तरफ दौडता है और उस पेंटिंग के पास पहुचता है. तब कालचक्षु कहता है रुक जाओ वरना मै किसीको नही छोडुंगा. मरोगे तुम सब मरोगे. तब अभिमन्यू कहता है इस दुनिया मे शैतान से भी उपर एक बडी शक्ती होती है भगवान और उसके आगे कोई बडा नही है. तुम भी नही. उधर अद्विक उस पेंटिंग को सीधा करता है और अपने पेंटिंग का सामान निकालकर उसकी आँखे मिटाने लग जाता है. जैसे ही अद्विक उसकी आँखे मिटाने लगता है कालचक्षु जोर से चिल्लाने लगता है. कालचक्षु की आँखो से खून बहना शुरु हो जाता है. थोडी ही देर मे अद्विक कालचक्षु की आँखे मिटा देता है. इधर कालचक्षु जलने लग जाता है और चिल्लाते हुये कहता है मै वापस आऊंगा. आऊंगा मै वापस. और थोडी देर मे ही जलकर राख हो जाता है. उसके राख होते ही अद्विक वही अपनी पीठ दिवार से घिसते हुये नीचे बैठ जाता है और रोने लग जाता है और कहता है ये सब मेरे वजह से हुआ. नाही मै उसकी पैंटिंग बनाता और नाही वो जिंदा होता और सबको मारता. तब काव्या, कृतिका और अभिमन्यू उसके पास चले जाते है. अभिमन्यू अद्विक से कहता है होनी को कोई नही टाल सकता. जो होना है जहाँ होना है वो होके रहता है हम या कोई और इसमे कुछ नही कर सकते. अभिमन्यू की बातो से अद्विक को थोडी हिम्मत मिल जाती है. वो अपने आप को संभालते हुये खडा हो जाता है. थोडी देर बाद अभिमन्यू अद्विक, काव्या और कृतिका चारो वहा से बाहर आ जाते है और बाहर खडे होकर उस रिसॉर्ट को देखते है और वहा से अपने अपने घर लौटते है.
जो भी हुआ था वो सब बहुत बुरा और खतरनाक था. वो चारो भी उसे एक बुरे सपने की तरह भुलना चाहते थे. वो चारो चाहकर भी उस हादसे को नही भूल पा रहे थे. लेकिन जिंदगी मे आगे बढना पडता है. वक्त सारे घाव भर देता है ये बात सच है.
“कालचक्षु कभी खतम नही हुआ था और नाही कभी खतम होगा वो बस दफन हो गया है और फिर से लौटने का इंतजार कर रहा है. कुछ कहानिया अधुरी रह जाती है कभी पुरी नही होती और यही अधुरी कहानी एक नयी कहानी की शुरुवात हो सकती है”.

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